क्या है:
जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष बनता है।
यह योग व्यक्ति के जीवन में रुकावटें, भय, असफलता और मानसिक तनाव लाता है।
अक्सर व्यक्ति को लगता है कि उसकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा या भाग्य साथ नहीं दे रहा — यह इसी दोष का संकेत है।
यह दोष पिछले जन्मों के अधूरे कर्मों या असंतुलित ऊर्जाओं का परिणाम माना जाता है, जो जीवन की गति को रोक देता है।
🔔 क्यों की जाती है:
यह पूजन राहु-केतु की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने और जीवन में स्थिरता व शांति लाने हेतु की जाती है।
भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के साथ महामृत्युंजय जप, राहु–केतु शांति यज्ञ और नाग अभिषेक किए जाते हैं।
यह पूजा व्यक्ति को भय, असफलता और मानसिक असंतुलन से मुक्त करती है।
🌞 पूजन के लाभ:
✅ राहु–केतु के दोष समाप्त होते हैं
✅ भय, तनाव और बाधाएँ दूर होती हैं
✅ करियर, विवाह और संतान से जुड़ी रुकावटें दूर होती हैं
✅ आत्मविश्वास और सौभाग्य में वृद्धि होती है
✅ पितृ कृपा और सफलता की प्राप्ति होती है
🎁 पूजा के पश्चात विशेष आशीर्वाद किट:
पूजन के बाद ज्योतिष लोक दर्शन द्वारा आपको कोरियर से चार, पाँच और छह मुखी रुद्राक्ष कवच,
प्रभु का भोग लगाया हुआ प्रसाद, पवित्र रक्षा सूत्र, और आशीर्वाद पत्र भेजा जाएगा।
यह दिव्य किट (मूल्य ₹2100) आपको पूरी तरह निःशुल्क भेजी जाएगी।




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