क्या है:
तलाक दोष तब बनता है जब कुंडली में सप्तम भाव (विवाह का भाव) पर राहु, मंगल, शनि या केतु का अशुभ प्रभाव होता है।
यह योग वैवाहिक जीवन में मतभेद, तनाव, अविश्वास और अलगाव की स्थिति उत्पन्न करता है।
कभी-कभी विवाह से पूर्व भी रिश्तों में अस्थिरता इसका परिणाम होती है।
🔔 क्यों की जाती है:
यह पूजन वैवाहिक संबंधों में पुनः प्रेम, सामंजस्य और स्थिरता स्थापित करने हेतु की जाती है।
पूजन में शिव–पार्वती आराधना, मंगल शांति हवन, और सुख-सौभाग्य यंत्र स्थापना की जाती है।
यह अनुष्ठान वैवाहिक जीवन में एक नई ऊर्जा और क्षमा की भावना लाता है।
🌞 पूजन के लाभ:
✅ दांपत्य जीवन में पुनः प्रेम और स्थिरता आती है।
✅ वैवाहिक कलह, अविश्वास और दूरी समाप्त होती है।
✅ परिवार में शांति और समझदारी बढ़ती है।
✅ भाग्य में वैवाहिक सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
🎁 प्रभु प्रसाद किट:
पूजन पूर्ण होने के पश्चात रुद्राक्ष कवच, रक्षा सूत्र, प्रसाद और आशीर्वाद पत्र कोरियर से निःशुल्क भेजा जाएगा।




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