क्या है:
मंगल दोष तब बनता है जब कुंडली में मंगल प्रथम, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो।
यह दोष विवाह में विलंब, संबंधों में मतभेद, या गुस्सा और आक्रोश के कारण अस्थिरता लाता है।
मंगल ऊर्जा और आत्मबल का ग्रह है, लेकिन जब यह अशुभ स्थिति में होता है, तो वही शक्ति जीवन में उथल-पुथल पैदा करती है।
🔔 क्यों की जाती है:
यह पूजन विवाह और संबंधों में संतुलन, प्रेम और स्थिरता लाने के लिए की जाती है।
पूजन में मंगल बीज मंत्र जप, शिव-पार्वती पूजन और मंगल शांति हवन किया जाता है।
🌞 पूजन के लाभ:
✅ विवाह में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं
✅ दांपत्य सुख और प्रेम में वृद्धि
✅ गुस्सा और आक्रोश पर नियंत्रण
✅ आत्मविश्वास और ऊर्जावान व्यक्तित्व का विकास
🎁 प्रभु प्रसाद किट:
पूजन के बाद आपको रुद्राक्ष कवच, प्रसाद, रक्षा सूत्र और आशीर्वाद पत्र कोरियर द्वारा निःशुल्क भेजा जाएगा।




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