क्या है:
जब कुंडली में सूर्य, शनि या राहु की स्थिति अशुभ हो और व्यक्ति के कर्म पितरों के अधूरे कार्यों से जुड़ जाएँ, तब पितृ दोष बनता है।
यह दोष व्यक्ति के जीवन में बार-बार आर्थिक, पारिवारिक या संतान संबंधी समस्याएँ लाता है।
अक्सर यह संकेत होता है कि पितरों की आत्मा को तृप्ति नहीं मिली है।
🔔 क्यों की जाती है:
यह पूजन पितरों की आत्मा को शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है।
पूजन में पितृ तर्पण, नवग्रह शांति, और महामृत्युंजय जप किया जाता है।
🌞 पूजन के लाभ:
✅ पितरों की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति।
✅ परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का संचार।
✅ संतान, करियर और धन संबंधी बाधाएँ समाप्त होती हैं।
✅ कर्मों की शुद्धि और जीवन में नई ऊर्जा आती है।
🎁 प्रभु प्रसाद किट:
पूजन के बाद दिव्य प्रसाद, रुद्राक्ष कवच और रक्षा सूत्र आपको निःशुल्क भेजा जाएगा।




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