क्या है:
जब शनि जन्म राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में आता है, तब साढ़ेसाती का काल होता है।
यह व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, परिश्रम और मानसिक परीक्षा का समय होता है।
कभी-कभी यह आर्थिक कठिनाई, स्वास्थ्य समस्या या रिश्तों में दूरी का कारण बनता है।
🔔 क्यों की जाती है:
यह पूजन शनि देव को प्रसन्न कर कर्मों की शुद्धि और स्थिरता लाने के लिए की जाती है।
पूजन में तेल तिल अर्पण, हनुमान आराधना और शनि शांति यज्ञ शामिल होते हैं।
🌞 पूजन के लाभ:
✅ आर्थिक और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है
✅ शनि की कृपा से जीवन में संतुलन आता है
✅ परिश्रम का उचित फल प्राप्त होता है
✅ कठिन समय में ईश्वरीय संरक्षण मिलता है
🎁 प्रभु प्रसाद किट:
पूजा पूर्ण होने के बाद आपको कोरियर द्वारा रुद्राक्ष कवच, रक्षा सूत्र और आशीर्वाद पत्र निःशुल्क भेजा जाएगा।




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